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बिहार चुनाव में दूसरों का खेल …

मायावती की ताबड़तोड़ रैलियां

मायावती के लिए तो तैयारी भी शुरू हो गई है. अक्टूबर में रैलियों के लिए मायावती का कार्यक्रम तैयार है. हालांकि, बसपा की स्थिति पिछले कुछ चुनावों में बिहार में लगातार खराब ही हुई है. बसपा की रणनीति हमेशा से चुनाव से पहले गठबंधन नहीं करने की रही है. बिहार में इस बार भी अकेले दम पर 235 सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है. पार्टी की रणनीति है सुप्रीमो मायावती हर फेज के पहले तीन चुनावी सभा करें.

इसी के तहत नौ अक्टूबर को बांका से मायावती चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगी. बसपा का यूपी में बड़ा जनाधार है. उसी जनाधार के सहारे बसपा लगातार बिहार में पांव पसारने की कोशिश करता रही है, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है. पिछले कुछ चुनाव की बात करें तो बसपा को वोट प्रतिशत कभी पांच प्रतिशत से बढ़ा नहीं है.

तीसरे मोर्चे के सहारे सपा

यही हाल समाजवादी पार्टी का भी है. सपा के वोट प्रतिशत की बात करे तो दो ढाई प्रतिशत से कभी अधिक बिहार में नहीं रहा है. इस बार सपा महागठबंधन से नाराज होकर तीसरे मोर्चे के सहारे चुनाव में है, जिसमें पप्पू यादव की पार्टी के अलावे एनसीपी भी है. इसलिए विधानसभा चुनाव में सपा का गठबंधन कुछ सीटों पर उलटफेर कर दे तो कोई आश्‍चर्य नहीं होना चाहिए.

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह नीतीश और लालू से नाराज हैं और इसलिए सपा की पूरी ताकत बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान दिख सकता है. यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बिहार का दौरा कर भी चुके हैं. चुनाव प्रचार में मुलायम सिंह के भी आने की संभावना है. यूपी के मुख्यमंत्री के साथ कई मंत्री और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता प्रचार में आ सकते हैं.

शरद पवार को बुलाएगी एनसीपी

सपा के साथ गठबंधन में शामिल एनसीपी भी महागठबंधन के सीट बंटवारे से नाराज होकर लालू-नीतीश को हर हाल में हराने की बात कह रही है. महागठबंधन ने तीन सीट एनसीपी को दिया था, लेकिन एनसीपी की ओर से 12 सीट मांगा गई औ बात नहीं बनी.

एनसीपी भी महागठंबधन के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. एनसीपी का जनाधार महाराष्ट्र में है, लेकिन वर्षों से तारिक अनवर बिहार में एनसीपी की कमान संभाले हुए हैं. तारिक अनवर कटिहार से पार्टी के सांसद भी हैं. ऐसे एनसीपी का बिहार में वोट प्रतिशत कभी दो प्रतिशत से अधिक नहीं रहा है. इस बार पार्टी सपा और पप्पू यादव की पार्टी के साथ कुछ सीट निकालने की हरसंभव कोशिश कर रही है. एनसीपी भी अपने सुप्रीमो शरद पवार को चुनाव प्रचार में उतारने की तैयारी कर रही है. एनसीपी के दूसरे बड़े नेता भी आ सकते हैं.

शिवसेना भी मैदान में

महाराष्ट्र से ही संबंध रखने वाली शिवसेना बिहार विधानसभा चुनाव में 150 सीटों पर उम्मीदवार उतारने जा रही है. शिवसेना केंद्रीय मंत्री के साथ 11 सांसदों और पार्टी के वरिष्ट नेताओं को लाने की तैयारी कर रहा है. इसलिए बिहार विधानसभा का चुनाव दिग्‍गज प्रचारकों के कारण दिलचस्प होने जा रही है.

दरअसल, बिहार में इन दलों का भले ही कोई बड़ा जनाधार न हो, लेकिन अपने-अपने प्रदेश में इन पार्टियों की सरकार है. बिहार चुनाव इन पार्टियों के लिए जीवन-मरण की बात भी नहीं है, लेकिन यहां आकर शक्ति प्रदर्शन जरूर करने की कोशिश करेंगे. ऐसे में यह देखना दिलस्प होगा कि इन पार्टियां से सबसे ज्यादा सीटें किसे प्राप्त होती है और ये पार्टियां किसे सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं.

Article source: http://hindi.news18.com/news/bihar/bsp-sp-ncp-shiv-sena-can-damage-nda-and-grand-alliance-political-game-in-bihar-elections-804360.html

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